शिवरात्रि

आजकल सभी के मन मे यह प्रश्न उठ रहा है कि महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) 2020 में कब है? जैसे ही महाशिवरात्रि नजदीक आती है हर शिवभक्त के मन मे भक्ति भाव की लहर दौड़ पड़ती है। कोई पूछता है कि महाशिवरात्रि कब है? तो कोई सोशल मीडिया पर महाशिवरात्रि का महत्व सर्च करने लगता है। महाशिवरात्रि हिंदुओं के लिए एक उत्सव का दिन होता है, इसमें रात भर शिवभक्त भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। इस ब्लॉग में हम आप को Hindi में mahashivratri के बारे में विस्तार से बताएँगे.

महाशिवरात्रि का व्रत

Maha Shivratri एक अनोखा उत्सव है जिसमें लगभग सभी हिन्दू धर्म के व्यक्ति भाग लेते हैं। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए सब इस व्रत को करते हैं। इस व्रत को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग विधि से मनाया जाता है जिनमें से एक विधि नीचे बताई गई है। इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति सुबह से लेकर अगली सुबह तक किसी प्रकार के आहार का सेवन नहीं करते। भगवान शिव की कथा सुनते हैं। भगवान शिव के शिवलिंग पर कच्चा दूध,बेलपत्र,फुल,फल आदि चढ़ाकर अपना व्रत पूरा करते है। जिससे उनको क्षणिक लाभ मिल जाते हैं।

  • भगवान से पूर्ण लाभ लेने के लिए हमें अपने शास्त्र के अनुसार भक्ति करनी होगी जिससे हमें जीवन पर्यंत मिलने वाले लाभ प्राप्त हो सकते है। महाशिवरात्रि के व्रत को करने से मिलने वाले लाभ का क्षणिक होने का कारण यह है कि यह हमारे शास्त्रों में जो भक्ति विधि लिखी है उनके विरुद्ध है।
  • हमारे शास्त्रों में लिखा है कि हमें किसी भी प्रकार के व्रत नहीं करना चाहिए। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में लिखा है कि जो व्यक्ति शास्त्रोंविधि को छोड़ कर मनमानी पूजा करते हैं उनको मोक्ष प्राप्त नहीं होता है.
  • गीता अध्याय 6 श्लोक 16 मैं लिखा है कि योग व भक्ति विधि ना तो बहुत अधिक खाने वाले की और ना ही बिलकुल ना खाने वाले की अर्थात उपवास व्रत करने की सिद्ध हो सकती है अर्थात व्रत करना सख्त मना है। फिर भी हम व्रत करते हैं जिसे हमें केवल क्षणिक लाभ मिलता है। इससे न तो हमारा मोक्ष होता है और न ही हमें जीवन पर्यंत लाभ मिलता है।

  • शिवजी के सामर्थ्य की एक अन्य कथा

    एक समय की बात है एक भस्मागिरी नाम का शिवभक्त था, जो अपनी इच्छाफल हेतु भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहता था। भस्मागिरी अपने ज्ञान के अनुसार भगवान शिव की भक्ति (हठयोग) करने लगा, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव उन्हें इच्छावर देने के लिए तैयार हो गए। इच्छावर में भस्मागिरी ने भगवान शिव से उनके भस्मकड़ा प्राप्त करने की इच्छा जाहिर की। भगवान शिव ने सोचा कि यह एक साधु संत है, किसी के भय के कारण अपनी सुरक्षा हेतु भस्मकड़ा प्राप्त करने की इच्छा जाहिर कर रहा है। भगवान शिव ने भस्मागिरी की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे अपना भस्मकड़ा इच्छावर के रूप में प्रदान किया।

  • भस्मागिरी भगवान शिव से भस्मकड़ा प्राप्त कर पलभर में ही तेवर बदल कर भगवान शिव से कहता है कि:

    “हे! भोले शंकर तू हो जा सावधान अब तुम्हारा काल आने वाला है”

    और भगवान शिव को भस्मकड़ा के द्वारा भस्म करने के लिए उनके पास जाता है। भगवान शिव यह देखकर डर जाते हैं और अपनी जान बचाकर दौड़ने लगते हैं। फिर वहा पूर्ण परमात्मा ने मोहिनी रूप बनाकर भस्मासुर को गंडक नाच नचाकर उसे भस्म किया। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि भगवान शिव अजर अमर नहीं है । ये केवल तीन लोक के भगवान हैं। उनसे न्यारा एक महाशिव भी है जिसे सदाशिव भी कहते 


  • महाशिवरात्रि 2020 पर जानिए कौन है पूर्ण परमात्मा?

    इस महाशिवरात्रि 2020 पर अवश्य जानिए की आखिर पूर्ण परमात्मा कौन है? आप को बता दें की अनंत ब्रह्मांडो के रचनाहार कबीर साहेब जी यानी कविर देव जी है। ये सभी आत्माओं के पिता है। इन्होंने ही 21 ब्रह्मांडो सहित असंख्य ब्रह्मांडो की रचना की है। ये हमें हमारे असली घर सतलोक का ज्ञान कराने के लिए समय समय पर या तो खुद यहां आते है या फिर अपने संत को काल के लोक में भेजते है. आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण संत है। संत रामपाल जी महाराज की दया से ही हम वापस हमारे असली घर, शाश्वत स्थान सतलोक जा सकते है। अधिक जानकारी के लिए जरूर देखें साधना चैनल रोज शाम 7:30 से 8:30.तक 

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