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कबीर साहेब की जीवनी

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कबीर  या  भगत कबीर  15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिंदी सहित्य  के  भक्तिकालीन युग  में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन सिखों ☬ के आधी ग्रन्थ में भी देखने को मिलता है। [1] [2] कबीर वो सभी धर्मों  एक समान  समझकर   उन्होंने सामाज में फैली कुरीतियों, कर्मकांड, अंधविश्वास की निंदा की और सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की थी।उनके जीवनकाल के दौरान हिन्दू और मुसलमान दोनों ने उन्हें अपने विचार के लिए धमकी दी थी। कबीर नामक धार्मिक सम्प्रदाय इनकी शिक्षाओं के अनुयायी हैं। कबीर साहेब का लहर  तारा पर कमल के फूल पर प्रकट हुय थे  लहर तारा तालाब कबीर साहेब प्रकट स्थान कबीर के (लगभग 14वीं-15वीं शताब्दी) जन्म स्थान के बारे में विद्वानों में मतभेद है परन्तु अधिकतर विद्वान इनका जन्म काशी में ही मानते हैं, जिसकी पुष्टि स्वयं कबीर का यह कथन भी करता है। " काशी में परगट भये ,रामानंद चेताये  " कबीर ...

शिवरात्रि

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आजकल सभी के मन मे यह प्रश्न उठ रहा है कि  महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) 2020 में कब है?  जैसे ही महाशिवरात्रि नजदीक आती है हर  शिवभक्त  के मन मे भक्ति भाव की लहर दौड़ पड़ती है। कोई पूछता है कि महाशिवरात्रि कब है? तो कोई सोशल मीडिया पर  महाशिवरात्रि का महत्व  सर्च करने लगता है।  महाशिवरात्रि हिंदुओं  के लिए एक उत्सव का दिन होता है, इसमें रात भर शिवभक्त भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। इस ब्लॉग में हम आप को  Hindi  में  mahashivratri  के बारे में विस्तार से बताएँगे. महाशिवरात्रि का व्रत Maha Shivratri  एक अनोखा उत्सव है जिसमें लगभग सभी हिन्दू धर्म के व्यक्ति भाग लेते हैं। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए सब इस  व्रत  को करते हैं। इस व्रत को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग विधि से मनाया जाता है जिनमें से एक विधि नीचे बताई गई है। इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति सुबह से लेकर अगली सुबह तक किसी प्रकार के आहार का सेवन नहीं करते।  भगवान शिव की कथा  सुनते हैं। भगवान शिव के शिवलिंग पर कच्चा दूध,बेलपत्र,फुल,फल आद...

संत रामपाल जी महाराज का जीवन संघर्ष सेली

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संत रामपाल जी महाराज जी की जीवनी संत रामपाल जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना जिला सोनीपत हरियाणा में एक किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई पूरी करके हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजिनियर की पोस्ट पर 18 वर्ष कार्यरत रहे। सन् 1988 में परम संत रामदेवानंद जी से दीक्षा प्राप्त की तथा तन-मन से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया। संत रामपाल जी को नाम दीक्षा 17 फरवरी 1988 को फाल्गुन महीने की अमावस्या को रात्राी में प्राप्त हुई। उस समय संत रामपाल जी महाराज की आयु 37 वर्ष थी। उपदेश दिवस (दीक्षा दिवस) को संतमत में उपदेशी भक्त का आध्यात्मिक जन्मदिन माना जाता है। उपरोक्त विवरण श्री नास्त्रोदमस जी की उस भविष्यवाणी से पूर्ण मेल खाता है जो पृष्ठ संख्या 44.45 पर लिखी है। ”जिस समय उस तत्वदृष्टा शायरन का आध्यात्मिक जन्म होगा उस दिन अंधेरी अमावस्या होगी। उस समय उस विश्व नेता की आयु 16, 20, 25 वर्ष नहीं होगी, वह तरुण नहीं होगा, बल्कि वह प्रौढ़ होगा और वह 50 और 60 वर्ष के बीच की उम्र में संसार में प्रसिद्ध होगा। वह सन् 2006 होग...

असली ब्राह्मण को न है

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आज हम चर्च करेंगे कि हमारे पवित्र शास्त्रों के आधार पर ओर जानेंगे को न है असली ब्राह्मण कोंन  -----------------  श्री ब्राह्मण वह है जो परमात्मा को पहचानता है। उसकी पूरी जानकारी तथा तत्वज्ञान की पूरी जानकारी हमारे शास्त्रों से आधार पर  ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या :  जो ब्रह्म (ईश्वर) को छोड़कर किसी अन्य को नहीं पूजता वह ब्राह्मण। ब्रह्म को जानने वाला ब्राह्मण कहलाता है। कहते हैं कि जो पुरोहिताई करके अपनी जीविका चलाता है, वह ब्राह्मण नहीं, याचक है। जो ज्योतिषी या नक्षत्र विद्या से अपनी जीविका चलाता है वह ब्राह्मण नहीं, ज्योतिषी है और जो कथा बांचता है वह ब्राह्मण नहीं कथा वाचक है। इस तरह वेद और ब्रह्म को छोड़कर जो कुछ भी कर्म करता है वह ब्राह्मण नहीं है। जिसके मुख से ब्रह्म शब्द का उच्चारण नहीं होता रहता वह ब्राह्मण नहीं। शराब पीकर, मांस खाकर और असत्य वचन बोलकर भी खुद कोई ब्राह्मण नहीं कह सकता हैं। धर्म के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं रखकर, धर्म के बारे में मनमानी बाते बोलकर या धर्मविरोधी वचन बोलकर खुद को ब्राह्मण कहने वाले ब्राह्मण नहीं हो सकते।  वो काल भगवा...

नानक देव जी की कथा

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कप्या पढ़ें श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी में निम्न पष्ठों पर ढेर सारे प्रमाण कि श्री नानक जी को गुरु जी मिले थे। जिन्होंने नानक जी को दीक्षा दी थी। श्री नानक जी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वक्त गुरु के बिना भक्ति सफल नहीं हो सकती। यह भी जोर देकर कहा है कि गुरु पूरा हो। जो श्रद्धालु वक्त गुरु की शरण में नहीं जाते, वे श्री गुरु नानक देव जी की आज्ञा की अवहेलना कर रहे हैं। विचारणीय विषय है कि श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी महापुरूषों की अमतवाणी है तथा आदरणीय है तथा श्री मद्भगवत गीता तथा पवित्रा चारों वेद, परमेश्वर कबीर जी की अमतवाणी जो पांचवा वेद है। यह तो परमात्मा का विधान है। जैसे देश का संविधान है। वह प्रधान मन्त्राी नहीं है। प्रधान मन्त्राी कि आवश्यकता इसलिए है कि वह उस विधान अनुसार जनता की सुरक्षा करे। उनको उनका अधिकार दिलाए। कि पूर्ण परमात्मा जिंदा का रूप बनाकर बेई नदी पर आए अर्थात् जिंदा कहलाए तथा स्वयं ही दो दुनियाँ ऊपर (सतलोक आदि) तथा नीचे(ब्रह्म व परब्रह्म के लोक) को रचकर ऊपर सत्यलोक में आकार में आसन पर बैठ कर चाव के साथ अपने द...

सृष्टि रचना की विस्तृत जानकारी बाइबल से

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              *     परमात्मा द्वा रा सृष्टि की रचना  * नमस्कार दोस्तों --- आज हम बात कर रहे हैं हमारी पवित्र आध्यात्मिक पुस्तक बाइबल के बारे में जिसमें परमात्मा ने किस तरह से सृष्टि की रचना की और किस तरह से मनुष्य को बनाया और किस तरह से चंद्र, सुरज 'आदि सभी की रचना की ------                      जब एक बढ़ई मेज बनाने की इच्छा करता है तो उसे पूर्व विद्यमान वस्तुओं जैसे लकड़ी, कीलें, आरी, हथौड़ी आदि की आवश्यकता पड़ती है, तब ही वह मेज बना सकता है। वह मेज बनाता है. किन्तु परमात्मा केवल अपनी शब्द शक्ति इस सन्सार की रचना  करता है  क्योंकि केवल ईश्वर ही सृष्टि कर सकता है ईश्वर  ने इस तरह से किस तरह से सन्सार की रचना की जिसका प्रमाण पवित्र बाइबल में है   तो आइए जानते हैं किस प्रकार परमेश्वर  ने 6 दिन में सृष्टि की रचना की और सातवें दिन अपने सनातन परमधाम (सतलोक) में अपने सिंघासन पर विराजमान हो गए *पहले दिन ईश्वर ने प्रकाश  का निर्माण किया * दूसरे दिन उसने आ...

GodKabir_PrakatDiwas_2020

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कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते हैं अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने। संत गरीबदास जी की वाणी है - न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप। पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।। कबीर परमेश्वर का शरीर हाड़ मांस से बना नहीं है। वह अविनाशी परमात्मा हैं। कबीर परमात्मा जन्म-मृत्यु से परे हैं। वह सशरीर प्रकट हुए थे और सशरीर मगहर से अपने सतलोक गए थे। हाड चाम लोहू नहीं मोरे, जाने सत्यनाम उपासी। तारन तरन अभै पद दाता, मैं हूं कबीर अविनासी।। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है, कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कुंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है। यह लीला केवल कबीर परमात्मा ही करते हैं। अधिक जानकारी के लिए पढे आध्यात्मिक पुस्तक  जीने की राह के लिये यह किलिक करके वह देखिए साधना टीवी रात्रि 7:30 बजे से और विजिट करें हमारी वेबसाइट पर https://www.jagatgururampalji.org/