नानक देव जी की कथा


कप्या पढ़ें श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी में निम्न पष्ठों पर ढेर सारे प्रमाण कि श्री नानक जी को गुरु जी मिले थे। जिन्होंने नानक जी को दीक्षा दी थी। श्री नानक जी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वक्त गुरु के बिना भक्ति सफल नहीं हो सकती। यह भी जोर देकर कहा है कि गुरु पूरा हो। जो श्रद्धालु वक्त गुरु की शरण में नहीं जाते, वे श्री गुरु नानक देव जी की आज्ञा की अवहेलना कर रहे हैं।


विचारणीय विषय है कि श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी महापुरूषों की अमतवाणी है तथा आदरणीय है तथा श्री मद्भगवत गीता तथा पवित्रा चारों वेद, परमेश्वर कबीर जी की अमतवाणी जो पांचवा वेद है। यह तो परमात्मा का विधान है। जैसे देश का संविधान है। वह प्रधान मन्त्राी नहीं है। प्रधान मन्त्राी कि आवश्यकता इसलिए है कि वह उस विधान अनुसार जनता की सुरक्षा करे। उनको उनका अधिकार दिलाए।


कि पूर्ण परमात्मा जिंदा का रूप बनाकर बेई नदी पर आए अर्थात् जिंदा कहलाए तथा स्वयं ही दो दुनियाँ ऊपर (सतलोक आदि) तथा नीचे(ब्रह्म व परब्रह्म के लोक) को रचकर ऊपर सत्यलोक में आकार में आसन पर बैठ कर चाव के साथ अपने द्वारा रची दुनियाँ को देख रहे हो तथा आप ही स्वयम्भू अर्थात् माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते, स्वयं प्रकट होते हो। कि पूर्ण परमात्मा जिंदा का रूप बनाकर बेई नदी पर आए 
अर्थात् जिंदा कहलाए तथा स्वयं ही दो दुनियाँ ऊपर (सतलोक आदि) तथा नीचे(ब्रह्म व परब्रह्म के लोक) को रचकर ऊपर सत्यलोक में आकार में आसन पर बैठ कर चाव के साथ अपने द्वारा रची दुनियाँ को देख रहे हो तथा आप ही स्वयम्भू अर्थात् माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते, स्वयं प्रकट होते हो। यही प्रमाण पवित्रा यजुर्वेद अध्याय 40 मं. 8 में है कि कविर् मनीषि स्वयम्भूः परिभू व्यवधाता, भावार्थ है कि कबीर
परमात्मा सर्वज्ञ है (मनीषि का अर्थ सर्वज्ञ होता है) तथा अपने आप प्रकट होता है। वह सनातन (परिभू) अर्थात् सर्वप्रथम वाला प्रभु है। वह सर्व ब्रह्मण्डों का (व्यवधाता)अर्थात् भिन्न-भिन्न सर्व लोकों का रचनहार है।ऐसे बहुत सारे अनेकों प्रमाण है जोकि संत जी के द्वारा उनके शब्दों के माध्यम से उनकी पुस्तकों के माध्यम से बताया गया है। अधिक जानकारी के लिए आप विजिट करें हमारी वेबसाइट https://www.jagatgururampalji.org/ व अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी रात्रि 7:30 बजे 8:30।

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