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Showing posts from July, 2020

शिवरात्रि

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आजकल सभी के मन मे यह प्रश्न उठ रहा है कि  महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) 2020 में कब है?  जैसे ही महाशिवरात्रि नजदीक आती है हर  शिवभक्त  के मन मे भक्ति भाव की लहर दौड़ पड़ती है। कोई पूछता है कि महाशिवरात्रि कब है? तो कोई सोशल मीडिया पर  महाशिवरात्रि का महत्व  सर्च करने लगता है।  महाशिवरात्रि हिंदुओं  के लिए एक उत्सव का दिन होता है, इसमें रात भर शिवभक्त भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। इस ब्लॉग में हम आप को  Hindi  में  mahashivratri  के बारे में विस्तार से बताएँगे. महाशिवरात्रि का व्रत Maha Shivratri  एक अनोखा उत्सव है जिसमें लगभग सभी हिन्दू धर्म के व्यक्ति भाग लेते हैं। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए सब इस  व्रत  को करते हैं। इस व्रत को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग विधि से मनाया जाता है जिनमें से एक विधि नीचे बताई गई है। इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति सुबह से लेकर अगली सुबह तक किसी प्रकार के आहार का सेवन नहीं करते।  भगवान शिव की कथा  सुनते हैं। भगवान शिव के शिवलिंग पर कच्चा दूध,बेलपत्र,फुल,फल आद...

संत रामपाल जी महाराज का जीवन संघर्ष सेली

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संत रामपाल जी महाराज जी की जीवनी संत रामपाल जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना जिला सोनीपत हरियाणा में एक किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई पूरी करके हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजिनियर की पोस्ट पर 18 वर्ष कार्यरत रहे। सन् 1988 में परम संत रामदेवानंद जी से दीक्षा प्राप्त की तथा तन-मन से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया। संत रामपाल जी को नाम दीक्षा 17 फरवरी 1988 को फाल्गुन महीने की अमावस्या को रात्राी में प्राप्त हुई। उस समय संत रामपाल जी महाराज की आयु 37 वर्ष थी। उपदेश दिवस (दीक्षा दिवस) को संतमत में उपदेशी भक्त का आध्यात्मिक जन्मदिन माना जाता है। उपरोक्त विवरण श्री नास्त्रोदमस जी की उस भविष्यवाणी से पूर्ण मेल खाता है जो पृष्ठ संख्या 44.45 पर लिखी है। ”जिस समय उस तत्वदृष्टा शायरन का आध्यात्मिक जन्म होगा उस दिन अंधेरी अमावस्या होगी। उस समय उस विश्व नेता की आयु 16, 20, 25 वर्ष नहीं होगी, वह तरुण नहीं होगा, बल्कि वह प्रौढ़ होगा और वह 50 और 60 वर्ष के बीच की उम्र में संसार में प्रसिद्ध होगा। वह सन् 2006 होग...

असली ब्राह्मण को न है

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आज हम चर्च करेंगे कि हमारे पवित्र शास्त्रों के आधार पर ओर जानेंगे को न है असली ब्राह्मण कोंन  -----------------  श्री ब्राह्मण वह है जो परमात्मा को पहचानता है। उसकी पूरी जानकारी तथा तत्वज्ञान की पूरी जानकारी हमारे शास्त्रों से आधार पर  ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या :  जो ब्रह्म (ईश्वर) को छोड़कर किसी अन्य को नहीं पूजता वह ब्राह्मण। ब्रह्म को जानने वाला ब्राह्मण कहलाता है। कहते हैं कि जो पुरोहिताई करके अपनी जीविका चलाता है, वह ब्राह्मण नहीं, याचक है। जो ज्योतिषी या नक्षत्र विद्या से अपनी जीविका चलाता है वह ब्राह्मण नहीं, ज्योतिषी है और जो कथा बांचता है वह ब्राह्मण नहीं कथा वाचक है। इस तरह वेद और ब्रह्म को छोड़कर जो कुछ भी कर्म करता है वह ब्राह्मण नहीं है। जिसके मुख से ब्रह्म शब्द का उच्चारण नहीं होता रहता वह ब्राह्मण नहीं। शराब पीकर, मांस खाकर और असत्य वचन बोलकर भी खुद कोई ब्राह्मण नहीं कह सकता हैं। धर्म के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं रखकर, धर्म के बारे में मनमानी बाते बोलकर या धर्मविरोधी वचन बोलकर खुद को ब्राह्मण कहने वाले ब्राह्मण नहीं हो सकते।  वो काल भगवा...